अध्याय 16 — कोश : एक परिचय
NCERT | अभिव्यक्ति और माध्यम | कक्षा 11
"अदृश्य की आड़ के पीछे छिपी हैं कुछ ऐसी सुरंगें, जो अपने गुप्त रास्तों से शब्दों की जन्मकथा तक ले जाती हैं।" — राजेश जोशी (हिंदी कवि)
📌 भाग 1 — कोश की आवश्यकता (कहानी के माध्यम से भूमिका)
पढ़ते समय जब किसी शब्द का अर्थ अथवा संदर्भ स्पष्ट नहीं होता, तब शब्दकोश का ध्यान आता है। इस अध्याय में चंद्रिका नामक विद्यार्थी की कहानी के ज़रिए शब्दकोश, विश्वज्ञान कोश, चरित्र कोश (व्यक्ति कोश) और साहित्य कोश — इन चारों प्रकार के कोशों का परिचय दिया गया है।
कहानी का सार: चंद्रिका उपन्यास पढ़ते समय 'विदग्ध' शब्द के अर्थ को लेकर उलझ जाती है। एक शब्दपरी (जिसका नाम भी चंद्रिका है) उसे शब्दलोक की सैर कराती है, जहाँ वह बताती है कि शब्दकोश में शब्द किस क्रम-व्यवस्था से रखे जाते हैं। साथ ही वह चंद्रिका को विश्वज्ञान लोक, चरित्र लोक और साहित्य लोक की भी सैर कराती है।
🧠 MNEMONIC — कहानी का सार याद रखने की Trick
"श.वि.च.सा." — शब्दलोक → विश्वज्ञान लोक → चरित्र लोक → साहित्य लोक
📌 भाग 2 — शब्दकोश : परिभाषा और विशेषताएँ
परिभाषा (NCERT के अनुसार)
शब्दकोश, शब्दों का ख़ज़ाना है। इसमें एक भाषा-भाषी समुदाय में प्रयुक्त होने वाले शब्दों को संचित किया जाता है।
शब्दकोश में शब्दों की —
- व्युत्पत्ति (शब्द कहाँ से बना)
- स्रोत (मूल भाषा)
- लिंग (पुल्लिंग/स्त्रीलिंग)
- शब्द-रूप
- विभिन्न संदर्भपरक अर्थों के बारे में जानकारी दी जाती है।
🧠 MNEMONIC — शब्दकोश में क्या मिलता है?
"व्यु.स्रो.लिं.श.अ." — व्युत्पत्ति → स्रोत → लिंग → शब्द-रूप → अर्थ (संदर्भपरक)
★ EXAM TIP: "शब्दकोश किसे कहते हैं?" — 2 अंकों का प्रश्न।
📌 भाग 3 — शब्दकोश में शब्दों का क्रम-निर्धारण (सबसे महत्त्वपूर्ण भाग)
मूल नियम
हिंदी शब्दकोश में हिंदी वर्णमाला का अनुसरण किया जाता है। लेकिन इसमें 2 महत्त्वपूर्ण अंतर हैं जो सामान्य वर्णमाला-क्रम से भिन्न हैं —
📊 TABLE: वर्णमाला क्रम बनाम शब्दकोशीय क्रम के 2 अंतर
| क्रम | सामान्य हिंदी वर्णमाला | शब्दकोशीय क्रम |
|---|---|---|
| अंतर 1 | वर्णमाला 'अ' से शुरू होती है | शब्दकोश का पहला खंड 'अं' खंड होता है, फिर 'अ', 'आ', 'इ' आदि क्रम से आते हैं |
| अंतर 2 | संयुक्ताक्षर क्ष, त्र, ज्ञ, श्र वर्णमाला के अंत में आते हैं | शब्दकोश में ये संयुक्ताक्षर अपने मूल वर्णों (अवयवों) के अंत्याक्षर के साथ रखे जाते हैं |
संयुक्ताक्षरों का विभाजन — विस्तार से
| संयुक्ताक्षर | बना है | रखा जाता है |
|---|---|---|
| क्ष | क् + ष = क्ष | 'क' खंड में (चूँकि प्रथमाक्षर 'क' है) |
| त्र | त् + र = त्र | 'त' खंड में |
| ज्ञ | ज् + ञ = ज्ञ | 'ज' खंड में |
| श्र | श् + र = श्र | 'श' खंड में |
नियम का तर्क (चाचा जी/शब्दपरी के शब्दों में): संयुक्ताक्षर का पहला अक्षर यानी प्रथमाक्षर ही यह तय करता है कि वह किस खंड में आगे जाकर रखा जाएगा। जैसे 'क्ष' — 'क' और 'ष' के योग से बना संयुक्ताक्षर है, इसका प्रथमाक्षर 'क' है, अतः यह 'क' खंड में ही आगे जाकर रखा जाता है (ठीक 'क्व' उपखंड के बाद)।
🧠 MNEMONIC — 2 अंतर याद रखने की Trick
"अं पहले, संयुक्त बाद में अपने मूल में"
- अंतर 1 → 'अं' सबसे पहले आता है
- अंतर 2 → संयुक्ताक्षर अपने मूल व्यंजन (प्रथमाक्षर) में समाहित होते हैं
★ EXAM TIP: "शब्दकोश में शब्दों का क्रम वर्णमाला-क्रम से किस प्रकार भिन्न है?" — 3-5 अंकों का प्रश्न। यह पाठ का सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला प्रश्न है।
📌 भाग 4 — खंड और उपखंड की व्यवस्था
परिभाषा
जिस प्रकार पृथ्वी पर नए नगरों को खंडों और उपखंडों में योजनाबद्ध ढंग से बाँटा जाता है और हर मकान को एक संख्या दी जाती है, उसी प्रकार शब्दकोश में भी शब्दों को पहले खंडों में और फिर हर खंड को मात्राओं के आधार पर उपखंडों में बाँटा जाता है।
खंड का नामकरण
- खंडों के नाम वर्णमाला के अक्षरों पर रखे जाते हैं — जैसे 'क खंड', 'च खंड', 'प खंड' आदि।
- खंडों का क्रम भी वर्णमाला के अक्षरों के क्रम के ही अनुसार है (ऊपर बताए गए 2 अंतरों के साथ)।
उपखंड का नामकरण (मात्रा के आधार पर)
व्यंजन-नामित खंडों को मात्राओं के आधार पर उपखंडों में बाँटा जाता है।
📊 TABLE: 'क' खंड के उपखंडों का क्रम (उदाहरण)
| क्रम | उपखंड | उदाहरण शब्द |
|---|---|---|
| 1 | कं | कंकड़ी |
| 2 | क | कल, कमल |
| 3 | का | काका |
| 4 | कि | किताब |
| 5 | की | कीमत |
| 6 | कु | कुल |
| 7 | कू | कूल |
| 8 | के | केला |
| 9 | कै | कैसे |
| 10 | को | कोश |
| 11 | कौ | कौन |
| 12 | (इसके बाद 'क्' + संयुक्ताक्षर वाले उपखंड) | क्या, क्यारी, क्रम, क्षमा आदि |
पूरा क्रम: कं → क → का → कि → की → कु → कू → के → कै → को → कौ → (फिर संयुक्ताक्षर वाले उपखंड)
संयुक्ताक्षर उपखंडों का क्रम (कौ के बाद)
कौ उपखंड के तुरंत बाद —
- 'क्य' उपखंड शुरू होता है (क+य से बने संयुक्ताक्षर) — क्या, क्यारी, क्यों
- फिर 'क्र' उपखंड (क+र से बना) — क्रंदन, क्रंदित, क्रम, क्रमश:, क्रा, क्रि
- फिर 'क्ल' और 'क्व' उपखंड
- सबसे अंत में 'क्ष' उपखंड (चूँकि क्ष = क+ष, और यह 'क्व' के बाद ही आना था)
🧠 MNEMONIC — उपखंड क्रम याद रखने की Trick
"स्वर पहले, संयुक्त बाद में" — स्वर-मात्रा वाले उपखंड (कं,क,का...कौ) पहले आते हैं, फिर संयुक्ताक्षर वाले उपखंड (क्य, क्र, क्ल, क्व, क्ष) आते हैं।
★ EXAM TIP: "शब्दकोश में खंड और उपखंड किस आधार पर बनाए जाते हैं?" — 3 अंकों का प्रश्न।
📝 भाग 5 — NCERT FORMAT BOX : ध्यान देने योग्य बातें (मूल पाठ से)
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ध्यान देने योग्य बातें
- शब्दकोश, शब्दों का ख़ज़ाना है। इसमें एक भाषा-भाषी समुदाय में प्रयुक्त होने वाले शब्दों को संचित किया जाता है।
- शब्दकोश में शब्दों की व्युत्पत्ति, स्रोत, लिंग, शब्द-रूप एवं विभिन्न संदर्भपरक अर्थों के बारे में जानकारी दी जाती है।
- हिंदी शब्दकोश में हिंदी वर्णमाला का अनुसरण किया जाता है परंतु अं से प्रारंभ होने वाले शब्द सबसे पहले दिए जाते हैं।
- यद्यपि हिंदी वर्णमाला में कुछ संयुक्त व्यंजन सबसे अंत में आते हैं परंतु शब्दकोश में उन्हें उस क्रम में रखा जाता है जिन व्यंजनों से मिलकर वे बने हैं, जैसे — क्+ष=क्ष, ज्+ञ=ज्ञ, त्+र=त्र, श्+र=श्र।
- स्वर रहित व्यंजन से प्रारंभ होने वाले शब्द उस व्यंजन में इस्तेमाल होने वाले सभी स्वरों के बाद में रखे जाते हैं, जैसे 'क्या' शब्द 'कौस्तुभ' के बाद ही आएगा।
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इस अंतिम बिंदु की व्याख्या
'क्या' एक स्वर-रहित व्यंजन (क् + य) से शुरू होने वाला शब्द है। 'कौस्तुभ' शब्द 'कौ' उपखंड (स्वर मात्रा वाला) में आता है। चूँकि सभी स्वर-मात्रा वाले उपखंड (कं, क, का ... कौ) पहले पूरे होते हैं, तभी संयुक्ताक्षर से बने स्वर-रहित उपखंड (क्य, क्र आदि) शुरू होते हैं। इसलिए 'क्या' सदैव 'कौस्तुभ' के बाद ही आएगा।
★ EXAM TIP: "'क्या' शब्द 'कौस्तुभ' के बाद ही क्यों आएगा?" — 2-3 अंकों का तार्किक प्रश्न।
📌 भाग 6 — संगमरमर पट्टिका (शब्द-परिचय पट्टिका) — 'विदग्ध' का उदाहरण
शब्दलोक में हर शब्द के भवन के बाहर एक संगमरमर की पट्टिका होती है, जिस पर शब्द का पूरा परिचय दिया होता है। इसमें संकेताक्षर प्रयुक्त होते हैं।
📝 NCERT उदाहरण — 'विदग्ध' शब्द की पट्टिका
विदग्ध — वि.(सं.) नागर; निपुण; पंडित; रसिक; रसज्ञ; जला हुआ; जठराग्नि से पका हुआ; पचा हुआ; नष्ट; गला हुआ; जो जला या पचा न हो; सुंदर; भद्रतापूर्ण। पु. चतुर या धूर्त आदमी; रसिक; एक घास।
📊 TABLE: संकेताक्षरों के अर्थ
| संकेताक्षर | अर्थ |
|---|---|
| वि. | विशेषण (शब्द एक विशेषण है) |
| पु. | पुल्लिंग (शब्द पुल्लिंग है) |
| (सं.) | संस्कृत (शब्द संस्कृत भाषा का है) |
| स्त्री. | स्त्रीलिंग |
महत्त्वपूर्ण बिंदु: शब्द से मिलने और मित्रता करने (अर्थात प्रयोग करने) से पहले उसके बारे में संगमरमर पट्टिका (यानी शब्दकोश की प्रविष्टि) से जान लेना ज़रूरी है, क्योंकि किसी लेखन में जहाँ जैसा संदर्भ होगा, वहाँ वैसा ही अर्थ लागू होगा।
★ EXAM TIP: "शब्दकोश में संकेताक्षरों का क्या महत्त्व है?" — 2 अंकों का प्रश्न।
📌 भाग 7 — शब्दकोश की निर्देशिका-सुविधा : शब्द-युग्म (Guide Words)
विशेषता
शब्दकोश के हर पृष्ठ के शीर्ष पर दो शब्दों का जोड़ा (शब्द-युग्म) दिया होता है — जैसे 'उत्तरण-उत्थान', 'जड़-जन' आदि।
उद्देश्य
यह शब्दकोश में साथियों (शब्दों) की तलाश को आसान बनाता है —
- शब्द-युग्म का पहला शब्द = उस पृष्ठ का पहला शब्द
- शब्द-युग्म का दूसरा शब्द = उस पृष्ठ का आख़िरी शब्द
इस प्रकार पूरे पृष्ठ पर किसी शब्द को तलाशने की ज़रूरत नहीं होती — शब्द-युग्म देखकर ही पता चल जाता है कि इस पृष्ठ पर इच्छित शब्द का होना संभव है या नहीं।
🧠 MNEMONIC
"पहला-आख़िरी बताए, ढूँढ़ना आसान बनाए"
★ EXAM TIP: "शब्दकोश के हर पृष्ठ पर शब्द-युग्म देने का क्या उद्देश्य है?" — 2-3 अंकों का प्रश्न।
📌 भाग 8 — संदर्भ-ग्रंथ (Reference Books) : परिभाषा और प्रकार
परिभाषा
जिस प्रकार शब्दकोश में शब्दों के अर्थ दिए होते हैं, उसी प्रकार संदर्भ-ग्रंथों में मानव द्वारा संचित ज्ञान को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
संदर्भ-ग्रंथ गागर में सागर के समान हैं — जब भी किसी विषय पर तुरंत जानकारी की आवश्यकता होती है, संदर्भ-ग्रंथ हमारे काम आते हैं।
महत्त्वपूर्ण बिंदु: संदर्भ-ग्रंथों में जानकारियों का सिलसिलेवार संकलन शब्दकोश के नियमों के अनुसार ही होता है (यानी वही वर्णमाला-क्रम और वही 2 अपवाद)।
📊 TABLE: संदर्भ-ग्रंथों के 4 प्रमुख प्रकार
| प्रकार | लोक का नाम (कहानी में) | परिभाषा |
|---|---|---|
| विश्वज्ञान कोश | विश्वज्ञान लोक | संदर्भ-ग्रंथ का सबसे विशद रूप है। इसमें मानव द्वारा संचित हर प्रकार की जानकारी और सूचना का संक्षिप्त संकलन होता है। |
| व्यक्ति कोश / चरित्र कोश | चरित्र लोक | इसमें साहित्य, संस्कृति, विज्ञान आदि क्षेत्रों के महान व्यक्तियों के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में जानकारी संकलित होती है। |
| साहित्य कोश | साहित्य लोक | इसमें साहित्यिक विषयों से संबंधित जानकारियाँ संकलित होती हैं। |
| शब्दकोश | शब्दलोक | इसमें शब्दों का अर्थ, स्रोत आदि संकलित होता है (मूल आधार-ग्रंथ)। |
🧠 MNEMONIC — 4 प्रकार के कोश याद रखने की Trick
"विश्व = हर जानकारी, चरित्र = महान व्यक्ति, साहित्य = साहित्यिक विषय, शब्द = शब्दों का अर्थ"
★ EXAM TIP: "विश्वज्ञान कोश और चरित्र कोश में क्या अंतर है?" — 3-5 अंकों का प्रश्न।
✅ FINAL SECTION — QUICK REVISION BOX
8 One-Liner Facts (परीक्षा में सीधे लिखने योग्य)
- शब्दकोश, शब्दों का ख़ज़ाना है, जिसमें भाषा-भाषी समुदाय के शब्दों को संचित किया जाता है।
- हिंदी शब्दकोश में वर्णमाला-क्रम अपनाया जाता है, परंतु 'अं' से शुरू होने वाले शब्द सबसे पहले आते हैं।
- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र जैसे संयुक्ताक्षर वर्णमाला में अंत में आते हैं, पर शब्दकोश में अपने प्रथमाक्षर वाले खंड में रखे जाते हैं।
- स्वर-रहित व्यंजन से शुरू होने वाले शब्द उस व्यंजन के सभी स्वर-मात्रा वाले शब्दों के बाद रखे जाते हैं।
- शब्दकोश में शब्दों को पहले खंडों में, फिर उपखंडों (मात्रा-आधारित) में बाँटा जाता है।
- हर पृष्ठ के शीर्ष पर दिया गया शब्द-युग्म शब्द खोजने में मदद करता है।
- संगमरमर पट्टिका पर संकेताक्षर (वि., पु., सं. आदि) शब्द का व्याकरणिक परिचय देते हैं।
- संदर्भ-ग्रंथों के मुख्य प्रकार हैं — विश्वज्ञान कोश, व्यक्ति/चरित्र कोश, साहित्य कोश।
4 महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ (परीक्षा में लिखने योग्य)
1. शब्दकोश: शब्दों का वह ख़ज़ाना है जिसमें एक भाषा-भाषी समुदाय में प्रयुक्त होने वाले शब्दों को उनकी व्युत्पत्ति, स्रोत, लिंग, शब्द-रूप एवं विभिन्न संदर्भपरक अर्थों सहित संचित किया जाता है।
2. संदर्भ-ग्रंथ: वे ग्रंथ जिनमें मानव द्वारा संचित ज्ञान को संक्षिप्त रूप में, शब्दकोश के नियमों के अनुसार सिलसिलेवार संकलित किया जाता है।
3. विश्वज्ञान कोश: संदर्भ-ग्रंथ का सबसे विशद रूप, जिसमें मानव द्वारा संचित हर प्रकार की जानकारी और सूचना का संक्षिप्त संकलन होता है।
4. साहित्य कोश: वह संदर्भ-ग्रंथ जिसमें साहित्यिक विषयों से संबंधित जानकारियाँ संकलित होती हैं।
पूरे अध्याय की Mnemonics Summary List
| किसके लिए? | Mnemonic |
|---|---|
| कहानी का सार (4 लोक) | "श.वि.च.सा." |
| शब्दकोश में क्या मिलता है | "व्यु.स्रो.लिं.श.अ." |
| वर्णमाला vs शब्दकोश क्रम के 2 अंतर | "अं पहले, संयुक्त बाद में अपने मूल में" |
| उपखंड क्रम | "स्वर पहले, संयुक्त बाद में" |
| शब्द-युग्म का उद्देश्य | "पहला-आख़िरी बताए, ढूँढ़ना आसान बनाए" |
| 4 प्रकार के कोश | "विश्व=हर जानकारी, चरित्र=महान व्यक्ति, साहित्य=साहित्यिक विषय, शब्द=शब्दार्थ" |
📌 अभ्यास प्रश्न 2 का हल (शब्दकोशीय क्रम — नमूना हल पद्धति)
दिए गए शब्द: परीक्षण, परिक्रमण, परिक्रम, विश्वामित्र, हिमाश्रया, हृदयंगम, ग्वालिन, घंटा, योगांत, घटक, घट, इच्छित, इक्षु, अंत:, अंकपित, आवृष्टि, उदाहन, उद्योग, जिज्ञासु
हल-पद्धति (सिद्धांत):
- पहले वर्णमाला-क्रम के अनुसार खंड तय करें ('अं' खंड सबसे पहले, फिर अ, आ, इ, ई... क्रम)।
- समान अक्षर से शुरू होने वाले शब्दों में दूसरे अक्षर की मात्रा देखें (उपखंड)।
- यदि संयुक्ताक्षर है (जैसे 'ग्वा' में ग्+व), तो वह अपने प्रथमाक्षर के खंड में स्वर-मात्रा वाले उपखंडों के बाद आएगा।
अनुमानित शब्दकोशीय क्रम: अंत:, अंकपित → आवृष्टि → इक्षु, इच्छित → उदाहन, उद्योग → ग्वालिन, घट, घटक, घंटा → जिज्ञासु → परिक्रम, परिक्रमण, परीक्षण → योगांत → विश्वामित्र, हिमाश्रया, हृदयंगम
इसे आप स्वयं ऊपर बताए गए नियमों (वर्णमाला-क्रम + मात्रा-क्रम) से जाँच कर पूर्ण उत्तर लिख सकते हैं — चाहें तो मैं इसका पूर्ण चरण-दर-चरण हल भी अलग से बना दूँ।
📌 अंतिम याद: "जिस प्रकार शब्दकोश में शब्दों के अर्थ दिए होते हैं, उसी प्रकार संदर्भ-ग्रंथों में मानव द्वारा संचित ज्ञान को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया जाता है।" — NCERT, अभिव्यक्ति और माध्यम, अध्याय 16